Friday, 17 October 2014

ॐ सूर्याय नम: !!

रामराम जी
ॐ सूर्याय नम: !!
रोशन हुई धरा ,,जनगण जीवन पाता है
अँधेरा भी घर सांकल लगा लेता है 
मंत्रोच्चार गूंज उठते हैं ,बजती है मन्दिर की घंटिया
सूरज के दर्शन ..पंछियों की मधुर कलरव
मद्धम सी बहती बयार ..सिहरती सी शाख पर महकती कलियाँ
ओस बरसी हुई सुखद सा अहसास दे जाती है ,गुनगुनाती सी सुबह
और सूर्य दर्शन ...जैसे जीवन बरस गया धरती पर
अनायास सी मुस्कुराहट पसर जाती है प्रकृति के होठो पर
चकित सी देखती हूँ चमत्कृत करती भोर को
जो अल सुबह दुल्हन सी संवर जाती है नजरे देहलीज पर गडाये
जैसे सारी रात जागकर काटी है उलाहना लिए
महकती सी लगती है
जैसे कह रही हो ..लो शुरू हुई आज की यात्रा --- विजयलक्ष्मी