Sunday, 10 May 2015

" रात का जाना नई सुबह का आना "

रामराम जी
आज का सूरज निहार लो मन भरके
आने वाली सुबह नई आस का होगा
नये अंदाज़ , नये वर्ष के कांधों पर सवार
समय का हाथ थामे सूरज सूरत बदलेगा या सीरत नहीं मालूम
बस इतनी बात पक्की है बदल जाएगा कलैण्डर का पन्ना उस पर लिखा समय
दिन तारीख ....साल के साथ बदलते हैं नक्षत्र
नहीं बदलते धरती का इंतज़ार
नई सुबह होगी ये एतबार
ओस का गिरना फूल का खिलना
धरा का नित्य ही संवरना
रात का जाना नई सुबह का आना
और.....मेरी आंख का विश्वास
मचलना निखरना संवरना संवर्धित होता रहे--- विजय