Friday, 18 April 2014

" बिन सूरज जीवन धरती का बस रातभर"

रामराम जी ..
इंतजार आँखों में भर धरती जगी रातभर ,
दीपक बन चाँद अंधियारे में जला रातभर ,
सूरज रोशन होगा भोर का भजता रातभर 
प्रेम पूरित मुदित चांदनी तडपती रातभर 
एक झलक मिले सांवरिया स्वप्न रातभर
नैन संग चैन नाम पियरवा तारे रटे रातभर
बिन सूरज जीवन धरती का बस रातभर
खुशियाँ का बादल बरसे रही दुआ रातभर --- विजय

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