रात का सफर चलता है साथ दिन के ,
वक्त की शिनाख्त तेरे साथ हो चली
मेरी जिन्दगी की शाम औ सहर सब कुर्बान है
रौशनी तुम्हारी ए सूरज मेरे संग हो चली
बजते हैं साज सारे दिनमान रंग सारे
चहक कर महकना हर अंगसंग हो चली
पैमाना ए तरद्दुद जिन्दगी का सफर
ये जिन्दगी खुदावंद खुदाई पैरहन हो चली .- विजयलक्ष्मी
वक्त की शिनाख्त तेरे साथ हो चली
मेरी जिन्दगी की शाम औ सहर सब कुर्बान है
रौशनी तुम्हारी ए सूरज मेरे संग हो चली
बजते हैं साज सारे दिनमान रंग सारे
चहक कर महकना हर अंगसंग हो चली
पैमाना ए तरद्दुद जिन्दगी का सफर
ये जिन्दगी खुदावंद खुदाई पैरहन हो चली .- विजयलक्ष्मी
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